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इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 29वीं मौत हो गई. हाईकोर्ट ने प्रशासन की रिपोर्ट को आई-वॉश करार दिया और रिटायर्ड जज सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच आयोग गठित किया. आयोग चार सप्ताह में रिपोर्ट पेश करेगा और मौतों, पानी की गुणवत्ता और जिम्मेदार अधिकारियों की जांच करेगा.
इंदौर. भागीरथपुरा में दूषित पानी से हो रही मौतों के मामले में मंगलवार को हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दिनों हुई 23 मौतों में से केवल 16 को दूषित पानी से जोड़कर माना गया, जबकि अन्य मौतों का कारण अस्पष्ट या अन्य बीमारियों से बताया गया. अदालत ने इस रिपोर्ट को ‘आई-वॉश’ करार दिया और स्पष्ट किया कि प्रशासन ने गंभीरता को गंभीरता से नहीं लिया. हाईकोर्ट ने कहा कि जनता के लिए स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता प्राथमिक अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है. हाईकोर्ट ने मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए रिटायर्ड जज सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में आयोग गठित किया है. आयोग को चार सप्ताह के भीतर अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी.
अदालत ने जिला प्रशासन, नगर निगम, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE), और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आयोग को सभी आवश्यक दस्तावेज, रिकॉर्ड और जानकारियां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए. शासन को आयोग के कार्यालय और स्टाफ की सुविधाएं भी प्रदान करनी होंगी. कोर्ट ने प्रशासन के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की और स्पष्ट किया कि जांच में कोई देरी नहीं होनी चाहिए.
स्वतंत्र जांच आयोग का गठन
न्यायिक आयोग भागीरथपुरा में उपलब्ध कराए जा रहे पानी की गुणवत्ता, दूषित होने के कारण, सीवरेज, औद्योगिक वेस्ट या पाइपलाइन लीकेज की भूमिका और मौतों की वास्तविक संख्या की जांच करेगा. आयोग यह भी देखेगा कि दूषित पानी कांड के बाद मेडिकल सुविधाएं और राहत कार्य पर्याप्त थे या नहीं.
जांच में शामिल बिंदु:
- क्या भागीरथपुरा में जनता को दूषित पानी मिल रहा था.
- दूषित पानी होने के कारणों की पहचान: सीवरेज, औद्योगिक वेस्ट या पाइपलाइन लीकेज.
- दूषित पानी से हुई मौतों की वास्तविक संख्या और प्रकार.
- मेडिकल सुविधाओं की उपलब्धता और राहत कार्य की प्रभावशीलता.
- प्रथमदृष्टया दोषी अधिकारियों की पहचान और जिम्मेदारी तय करना.
- प्रभावित लोगों के मुआवजे के लिए गाइडलाइन तैयार करना.
आयोग को मिले अधिकार
- अधिकारियों और गवाहों को समन करना
- सरकारी विभागों और अस्पतालों से रिकॉर्ड बुलवाना
- अधिमान्य लैब से पानी की जांच कराना
- मौके पर निरीक्षण और जरूरत पड़ने पर अन्य क्षेत्रों में मौका मुआयना
मौतों का ऑडिट
- प्रशासन ने रिपोर्ट में 23 मौतों का विश्लेषण किया.
- इनमें से 16 मौतें दूषित पानी से हुई मानी गई.
- 3 मौतों का कारण स्पष्ट नहीं.
- 4 मौतें अन्य बीमारियों से हुई.
- पोस्टमार्टम न होने पर वर्बल ऑटोप्सी का हवाला दिया गया.
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि वर्तमान स्थिति बेहद खतरनाक है. महू से भी दूषित पानी की रिपोर्टें सामने आ रही हैं. अदालत ने निर्देश दिए कि जनता को स्वच्छ और सुरक्षित पानी तुरंत उपलब्ध कराया जाए. प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए और कहा गया कि मौतों की सही संख्या, कारण और दोषियों की पहचान स्पष्ट होनी चाहिए.
इंदौर के भागीरथपुरा में पहलवान खूबचंद पुत्र गन्नुदास की मौत ने इलाके में सनसनी मचा दी है. करीब 15 दिन से उल्टी-दस्त की शिकायत होने के बावजूद उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से पर्याप्त इलाज नहीं मिला. दो बार इलाज के बाद भी राहत न मिलने पर मंगलवार शाम उनकी अचानक मौत हो गई. बेटे राहुल ने बताया कि उनके पिता पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय थे. रोजाना हाथ-पैर की मालिश करते थे. मजदूरी से परिवार का पालन-पोषण करते हुए उन्होंने अपने समय में कई जीत हासिल की. पहलवान होने के बावजूद उनकी जान दूषित पानी के चलते चली गई. राहुल ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि पिता का अंतिम समय ऐसे दर्दनाक तरीके से आएगा. यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे भागीरथपुरा क्षेत्र में पानी की सुरक्षा और प्रशासन की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें
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