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दिल्ली में अनिल के द्वारा तैयार की जा रही जयपुरी चप्पल बाजार में कमाल कर रही है. वह इस कारोबार से अपनी अलग पहचान बना रहे हैं और लोगों को रोजगार दे रहे हैं.
अनिल बताते हैं कि उनकी बनाई चप्पलें साधारण नहीं होती, इनकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह कम से कम दो साल तक आसानी से चलती है और पैरों में पसीना नहीं आने देती. यहीं नहीं, हाल ही में एक डॉक्टर ग्राहक के रूप में उनके पास आई और उन्होंने कहा कि लेदर की चप्पल पहनने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है. यह सुनकर अनिल और भी गर्व महसूस करते हैं कि उनकी मेहनत न सिर्फ लोगों को आराम देती है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी फायदेमंद है.
इस बिजनेस से करीब 15 लोग जुड़े हुए हैं. हर एक जोड़ी चप्पल बनाने में लगभग ₹500 रुपये की लागत आती है. अच्छी क्वालिटी और टिकाऊपन के कारण इनकी मांग हमेशा बनी रहती है. यही वजह है कि अनिल चौधरी का कारोबार उन्हें हर महीने 4 से 5 लाख रुपये तक की कमाई देता है.
कस्टमर का विश्वास
अनिल कहते हैं कि यह काम आसान नहीं है, लेकिन जब ग्राहक उनकी चप्पल पहनकर संतुष्टि और खुशी जताते हैं तो सारी मेहनत सफल हो जाती है. जयपुरी चप्पलों का बाजार सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई हिस्सों से लोग इन्हें पसंद करते हैं और खरीदते हैं.दिल्ली में चल रहे नेचर बाजार में भी इसे पसंद किया जा रहा है.
तरह-तरह की वैरायटी
अनिल के यहां कई तरह की जयपुरी चप्पल बनती हैं. इनमें सिंपल लेदर चप्पल, कढ़ाई और डिजाइन वाली पारंपरिक चप्पल, रंगीन धागों और कारीगरी से सजी चप्पल और फैंसी और मॉडर्न टच वाली लेदर चप्पलें शामिल हैं. ये चप्पलें न सिर्फ राजस्थान में बल्कि देशभर में पसंद की जाती हैं.
with more than 4 years of experience in journalism. It has been 1 year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am covering hyperlocal news f…और पढ़ें
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