Khandwa News: खंडवा जिले के आदिवासी क्षेत्र खालवा के रहने वाले रामसिंह काजले ने साबित कर दिया कि पढ़ाई में पीछे रह जाने से जिंदगी रुक नहीं जाती. 10वीं फेल होने के बाद उन्होंने खेती को ही अपना रास्ता बनाया, लेकिन साधारण किसान बनकर नहीं रुके. आज वही किसान एक कंपनी खड़ी कर चुके हैं, जिसमें हजारों किसान जुड़े हुए हैं और मिलकर आगे बढ़ रहे हैं.
34 गांव के 2000 से ज्यादा किसान जुड़े
रामसिंह काजले ने अकेले नहीं, बल्कि आसपास के किसानों को साथ लेकर काम शुरू किया. आज इस कंपनी से 34 से ज्यादा गांवों के करीब 2026 किसान जुड़े हुए हैं. सबसे खास बात ये कि इस कंपनी में सभी किसान शेयर होल्डर हैं, यानी कंपनी पर उन्हीं का हक है और वही इसे चला रहे हैं.
जैविक गेहूं से कर रहे बड़ा काम
यह कंपनी खास तौर पर जैविक ‘303 गेहूं’ का उत्पादन कर रही है. किसान अपनी फसल कंपनी को देते हैं और बदले में उन्हें बाजार से बेहतर दाम मिलता है. जहां आम मंडी में जैविक और सामान्य फसल का भाव एक जैसा मिल जाता है, वहीं यह कंपनी किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य दिला रही है.
खुद का ब्रांड बनाकर बेच रहे गेहूं
कंपनी ने अपना ‘तृप्ति’ नाम से ब्रांड भी तैयार किया है. अब गेहूं की ग्रेडिंग और पैकिंग करके सीधे बाजार में बेचा जा रहा है. करीब 33 रुपए किलो के हिसाब से गेहूं बेचा जा रहा है, वहीं 30 किलो का बैग करीब 1000 रुपए में उपलब्ध कराया जा रहा है.
मंडी सिस्टम से बचाकर दिलाया फायदा
पहले किसान अपनी फसल मंडी में बेचते थे, जहां व्यापारी सभी फसल को एक जैसा मानकर कम दाम देते थे. इससे किसानों को नुकसान होता था. लेकिन, कंपनी बनने के बाद अब किसानों को सीधे सही कीमत मिल रही है और उनका मुनाफा बढ़ा है.
NGO का मिला साथ, बदली तस्वीर
इस पूरी पहल में ‘आगा खां’ नाम की संस्था का भी बड़ा सहयोग मिला है. इस संस्था ने किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया और जरूरी संसाधन भी उपलब्ध कराए. किसानों का कहना है कि इस सहयोग से उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है.
2017 से शुरू हुई यात्रा
इस कंपनी की शुरुआत साल 2017 में हुई थी. करीब 9-10 साल में यह पहल एक बड़े स्तर पर पहुंच चुकी है. आज यह कंपनी खालवा ब्लॉक के किसानों के लिए पहचान बन गई है.
खुद बीज तैयार, लागत भी कम
कंपनी के किसान खुद ही बीज तैयार करते हैं, जिससे बाहर से बीज खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. इससे खेती की लागत कम हो जाती है और मुनाफा बढ़ता है. साथ ही जैविक खेती से जमीन भी सुरक्षित रहती है.
संघर्ष से सफलता तक की कहानी
रामसिंह काजले बताते हैं कि वह गरीब परिवार से थे और छात्रावास में रहकर पढ़ाई की. 10वीं में फेल होने के बाद पढ़ाई छूट गई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. किसानों से मिले, मीटिंग की और सभी की सहमति से इस कंपनी की शुरुआत की.
किसानों के लिए बना मजबूत मंच
आज यह कंपनी किसानों के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म बन चुकी है. इसमें अध्यक्ष से लेकर सभी पदों पर किसान ही काम कर रहे हैं और मिलकर कंपनी को आगे बढ़ा रहे हैं. रामसिंह काजले की यह कहानी बताती है कि अगर इरादा मजबूत हो तो कम पढ़ाई भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनती.
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