10 Problematic health sign in Women: 40 की उम्र पार करने के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं. यह बदलाव शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालते हैं. अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक इस समय एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और टेस्टोस्टेरोन जैसे प्रमुख हार्मोन का स्तर बदलता है, जिससे मेटाबॉलिज़्म, नींद, मूड, कामेच्छा और याददाश्त तक प्रभावित हो सकते हैं. हालांकि यह बदलाव उम्र का सामान्य हिस्सा हैं लेकिन अगर इनके लक्षण लगातार या गंभीर रूप में दिखें तो यह हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है. इन संकेतों को शुरुआती स्तर पर पहचान लेना ज़रूरी है ताकि समय पर डॉक्टर से परामर्श लेकर स्थिति को संभाला जा सके. आइए जानते हैं हार्मोनल असंतुलन के 10 प्रमुख संकेत जिन्हें महिलाएं नज़रअंदाज़ कर देती है लेकिन इनकी वजह से बड़ी परेशानियां आ सकती हैं.
इन 10 संकेतों को न करें नजरअंदाज
1.बिना कारण वज़न बढ़ना- टीओआई के मुताबिक हार्मोनल असंतुलन का सबसे आम संकेत अचानक या बिना कारण वज़न बढ़ना है. एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर बिगड़ने से पेट और कमर के आस-पास चर्बी जमा होने लगती है. वहीं कोर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन भी वजन बढ़ाने में भूमिका निभाता है.
2. लगातार थकान और ऊर्जा की कमी- थायरॉयड हार्मोन, इंसुलिन और कोर्टिसोल का असंतुलन थकान और सुस्ती का कारण बन सकता है. अगर पर्याप्त नींद लेने पर भी बार-बार थकान महसूस हो तो यह हार्मोनल बदलाव का संकेत हो सकता है.
3.मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन-40 के बाद महिलाओं में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के उतार-चढ़ाव से मूड जल्दी बदलना, तनाव, चिंता या हल्का डिप्रेशन महसूस होना आम हो जाता है.
4. नींद में बाधा– हार्मोनल असंतुलन नींद के पैटर्न को ख़राब कर देता है. कई महिलाएं सोने में कठिनाई, बार-बार नींद खुलना या रात में पसीने से नींद टूटना जैसी समस्याएं झेलती हैं.
5. कामेच्छा में कमी- एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और टेस्टोस्टेरोन का कम होना महिलाओं की सेक्सुअल हेल्थ को प्रभावित करता है. यौन रुचि में कमी के साथ-साथ निजी अंगों में सूखापन या असुविधा भी महसूस हो सकती है.
6.पीरियड्स का अनियमित होना-40 की उम्र के बाद महिलाएं परिमेनोपॉज़ फेज़ में प्रवेश करती हैं. इस दौरान पीरियड्स का समय बदलना, फ्लो का ज़्यादा या कम होना और कभी-कभी पीरियड्स का छूट जाना अक्सर पाया जाता है.
7. बालों का झड़ना- हार्मोनल बदलाव खासकर एस्ट्रोजन और थायरॉयड का बिगड़ना महिलाओं में बाल झड़ने और पतले होने का कारण बन सकता है. यह समस्या उम्र से पहले गंजापन जैसी स्थिति भी बना सकती है.
8. स्किन में बदलाव- एस्ट्रोजन कम होने से त्वचा में रूखापन, झुर्रियां और बारीक रेखाएं उभर सकती हैं. वहीं एंड्रोजन का स्तर बढ़ने से चेहरे पर तेलीयता और मुहांसे भी हो सकते हैं.
9. पाचन संबंधी समस्या- हार्मोनल फ्लक्चुएशन का असर पाचन पर भी पड़ता है. महिलाओं में अकसर गैस, एसिडिटी, कब्ज़ या दस्त जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं क्योंकि आंतों का मूवमेंट और बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है.
10.याददाश्त और ध्यान में कमी- एस्ट्रोजन की कमी दिमाग में न्यूरोट्रांसमीटर और ब्लड फ्लो को प्रभावित करती है. इसका असर याददाश्त पर पड़ता है. कई महिलाएं भूलने की आदत, ब्रेन फॉग या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई महसूस करती हैं.