दुनिया के 10% बच्चे इस परेशानी का हो गए शिकार ! जंक फूड इसकी सबसे बड़ी वजह, UNICEF की रिपोर्ट में खुलासा

Last Updated:

Childhood Obesity Crisis: यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में 5 से 19 साल के बच्चों में मोटापा अब अंडरवेट से बड़ा संकट बन चुका है. जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड की वजह से 10 में से 1 बच्चा मोटापे का शिकार हो ग…और पढ़ें

दुनिया के 10% बच्चे इस परेशानी का हो गए शिकार ! जंक फूड इसकी सबसे बड़ी वजहयूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के करीब 10% बच्चे मोटापे का शिकार हो गए हैं.
Childhood Obesity Surpasses Undernutrition: कुछ दशक पहले तक विश्व के कई देशों में छोटे बच्चों को सही पोषण नहीं मिल पाता था, जिसके कारण वे अंडरवेट (Underweight) हो जाते थे. अंडरवेट के कारण उनकी ग्रोथ प्रभावित होती थी और सेहत से जुड़ी समस्याएं पैदा हो जाती थीं. हालांकि अब यूनिसेफ (UNICEF) की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दुनियाभर में स्कूल जाने वाले बच्चों में मोटापा (Obesity) तेजी से बढ़ रहा है और इसका आंकड़ा अंडरवेट बच्चों से भी ज्यादा हो गया है. बच्चों में मोटापे की समस्या सभी देशों में बढ़ रही है और इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. यूनिसेफ की हालिया रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं, जो सभी पैरेंट्स को जान लेनी चाहिए.

UNICEF की नई रिपोर्ट के अनुसार अब दुनियाभर में बच्चों में अंडरवेट की समस्या से ज्यादा मोटापे की परेशानी फैल रही है. यह भी कुपोषण का ही एक रूप है, जिसके कारण बच्चे कम उम्र में मोटे हो जाते हैं. आंकड़ों पर नजर डालें, तो विश्व के 5 से 19 वर्ष की उम्र के करीब 10% बच्चे मोटापे का शिकार हो गए हैं. यह आंकड़ा करीब 18.80 करोड़ तक पहुंच गया है, जो चिंताजनक है. साल 2000 से अंडरवेट का प्रतिशत लगभग 13% से घटकर 9.2% हो गया है, जबकि मोटापे की दर 3% से बढ़कर 9.4% हो गई है. यह स्थिति स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी है, क्योंकि मोटापा भविष्य में डायबिटीज, हार्ट डिजीज और अन्य जानलेवा बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है. खासकर बच्चों के लिए यह बड़ी समस्या पैदा कर सकता है.
हालिया रिपोर्ट के अनुसार मोटापा अब अंडरवेट से ज्यादा व्यापक रूप से देखा जाने वाला कुपोषण बन चुका है. सब-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया को छोड़कर सभी क्षेत्रों में यह बदलाव हुआ है. यह दर्शाता है कि दुनिया में बच्चों की पोषण समस्याओं का स्वरूप अब एकतरफा गरीबी से अलग और जटिल हो गया है. प्रशांत द्वीप समूह जैसे Niue (38%), Cook Islands (37%) और Nauru (33%) में बच्चों में मोटापे की दर सबसे अधिक रिकॉर्ड की गई है. ये आंकड़े विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि अच्छे फूड्स की जगह सस्ते और हाई कैलोरी वाले इंपोर्टेड फूड्स के बढ़ते ट्रेंड से यह बदलाव हुआ है.

अक्सर माना जाता था कि हाई इनकम वाले देशों में बच्चे ज्यादा हेल्दी होते हैं, लेकिन यूनिसेफ की नई रिपोर्ट बताती है कि उच्च आय वाले देशों में भी बच्चों में मोटापे की दर कम नहीं है. चिली में 27%, अमेरिका और UAE में लगभग 21% स्कूल जाने वाले बच्चे मोटापे की श्रेणी में आते हैं. यह बताता है कि समस्या सिर्फ विकासशील देशों तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक रूप से मौजूद है. रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स के कारण बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है. इन फूड्स में बड़ी मात्रा में शुगर, नमक, फैट और एडिटिव्स होते हैं, जिनका बच्चे खूब सेवन कर रहे हैं. आजकल ये फूड्स बच्चों की डाइट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं. ये फूड्स ही बच्चों में मोटापा बढ़ा रहे हैं.

एक सर्वे के अनुसार 13 24 वर्ष के युवाओं में से 75% ने पिछले सप्ताह जंक फूड के विज्ञापन देखे और 60% ने बताया कि यह विज्ञापन उनके खाने की इच्छा को बढ़ा देते हैं. यहां तक कि युद्धग्रस्त क्षेत्रों में भी 68% युवा इस तरह के विज्ञापनों के संपर्क में आए. कुल मिलाकर जंक फूड्स के विज्ञापन भी इस समस्या को बढ़ा रहे हैं. यूनिसेफ की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बच्चों में मोटापे की समस्या से बचने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो देशों को स्वास्थ्य और आर्थिक रूप से भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है. 2035 तक मोटापे की वजह से होने वाले वैश्विक आर्थिक नुकसान का अनुमान 4 ट्रिलियन डॉलर प्रति वर्ष तक पहुंच सकता है. कुछ देशों ने सकारात्मक बदलाव की दिशा में कदम उठाया है. उदाहरण के तौर पर मैक्सिको ने स्कूलों में अल्ट्रा प्रोसेस्ड, हाई शुगर, हाई साल्ट और हाई फैट वाले फूड्स की बिक्री पर रोक लगा दी है, जिससे 34 मिलियन से अधिक बच्चों के पोषण परिवेश में सुधार हुआ है.

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में करीब 8 साल का अनुभव है. वे हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े टॉपिक पर स्टोरीज लिखते हैं. …और पढ़ें

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में करीब 8 साल का अनुभव है. वे हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े टॉपिक पर स्टोरीज लिखते हैं. … और पढ़ें

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
homelifestyle

दुनिया के 10% बच्चे इस परेशानी का हो गए शिकार ! जंक फूड इसकी सबसे बड़ी वजह

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *