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Agriculture Tips: इस मशीन को चलाने में एक साथी की जरूरत होती है, जो मशीन को संभालने का काम करता है. यह काम एक महीने से ज्यादा चलता है. मजदूर न मिलने से रीपर मशीन की डिमांड काफी ज्यादा बढ़ गई है. इसकी कीमत एक लाख रुपये से शुरू होती है.
बालाघाट. मध्य प्रदेश का बालाघाट एक धान उत्पादक जिला है. ऐसे में यहां पर धान का उत्पादन और उत्पादकता दोनों ही प्रदेश के अन्य जिलों के मुकाबले सबसे ज्यादा है. धान की फसल अंतिम पड़ाव पर है. धान कटाई का सीजन शुरू हो चुका है लेकिन किसान भाइयों के सामने मजदूर न मिलने की समस्या बढ़ गई है. ऐसे किसान रीपर मशीन की मदद से धान काट रहे हैं लेकिन रीपर चलाने वालों की संख्या भी कम है. ऐसे में इस मशीन की मदद से युवा अपना नया बिजनेस शुरू कर सकते हैं. आज हम आपको इस मशीन से काम करने के बिजनेस के बारे में बता रहे हैं.
हर दिन 7 एकड़ कटाई, महीने भर कमाई
शंकर खरे ने लोकल 18 को बताया कि वह एक दिन में रीपर मशीन की मदद से 5 से 7 एकड़ धान की कटाई करते हैं. अगर जमीन में नमी नहीं है, तो ज्यादा से ज्यादा और आसानी से कटाई कर सकते हैं लेकिन नमी रही तो समस्या होती है और बड़ी मुश्किल से 5 एकड़ तक ही कटाई कर सकते हैं. इसमें एक साथी की जरूरत होती है, जो मशीन को संभालने का काम करता है. यह काम महीने भर से ज्यादा समय तक चलता है. वहीं मजदूर न मिलने से रीपर की डिमांड काफी ज्यादा है. मशीन की कीमत एक लाख रुपये से शुरू होती है.
पलायन से अच्छा है यह काम
गांव के लड़के कमाई के लिए बड़े शहरों में जाकर मजदूरी करते हैं. साल-सालभर अपने घर-परिवार से दूर रहते हैं. ऐसे में गांव में रहकर रीपर चलाना ज्यादा अच्छा है. 600 रुपये में एक एकड़ खेत की कटाई हो जाती है. वहीं औसतन एक दिन 6 एकड़ भी कटाई करते हैं, तो 3600 रुपये एक दिन की कमाई है. वहीं एक एकड़ खेत में 800 मिली पेट्रोल लगता है. मेंटेनेंस में भी मामूली खर्च होता है. ऐसे में डेढ़ महीने के काम में इस बिजनेस से एक लाख 60 हजार रुपये तक कमा सकते हैं, जिसमें शुद्ध बचत एक लाख रुपये तक हो सकती है. आप मशीन की लागत एक ही सीजन में निकाल सकते हैं.
साल में दो सीजन कमाई का मौका
बालाघाट में धान की खेती दो बार होती है. खरीफ में मुख्य तौर पर धान की खेती होती है. वहीं रबी में भी धान की खेती होती है. ऐसे में रीपर चलाकर आप साल में दो बार अच्छी खासी आय अर्जित कर सकते हैं. वहीं बाकी समय आप खेती के दूसरे कार्य कर सकते हैं. इस मशीन से न सिर्फ मजदूरों की समस्या से मुक्ति दिलाई जा सकती है बल्कि धान कटाई की लागत को भी कम किया जा सकता है.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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