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मेटा के इंटरनल सर्वे में बड़ा खुलासा. इंस्टाग्राम पर हर 5 में से 1 बच्चे को अनचाहा अश्लील या खतरनाक कंटेंट दिख रहा है. जानिए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर क्या कहते हैं नए आंकड़े और माता-पिता को क्या सावधानी बरतनी चाहिए.
बच्चों की ऑनलाइन सेफ्टी पर बड़ा सवाल
आज के समय में सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक मोबाइल हमारे हाथ में रहता है. सोशल मीडिया तो अब बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. बच्चे घंटों तक इंस्टाग्राम पर रील्स देखते हैं या दोस्तों से चैट करते रहते हैं. कई माता-पिता सोचते हैं कि ‘बच्चा घर पर है, तो सुरक्षित है.’ लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके बच्चे की स्क्रीन पर आखिर क्या दिख रहा है?
सोशल मीडिया की चमक-दमक के पीछे एक कड़वी सच्चाई छिपी है. हाल ही में सामने आए एक रिपोर्ट ने इस सच्चाई को उजागर किया है. मेटा कंपनी के एक इंटरनल सर्वे (Meta Users Survey) में ऐसी जानकारी सामने आई है जो किसी भी माता-पिता को चिंतित कर सकती है.
हर 5 में से 1 बच्चा हो रहा है शिकार
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंस्टाग्राम और मेटा के दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर 13 से 15 साल के बच्चों की सिक्योरिटी को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं. कंपनी के अपने सर्वे में पाया गया कि 19 प्रतिशत किशोरों को इंस्टाग्राम पर ऐसे अश्लील या अनचाहे फोटो देखने पड़े, जिन्हें वे देखना नहीं चाहते थे. यानी हर 5 में से 1 बच्चे ने माना कि उसने अनचाहे ‘न्यूड’ फोटो या आपत्तिजनक कंटेंट देखा है.
सिर्फ अश्लीलता ही नहीं, जान का भी खतरा
सर्वे में ये भी सामने आया कि कुछ बच्चों को अपने फीड या मैसेज में खुद को नुकसान पहुंचाने (Self-harm) या आत्महत्या जैसी खतरनाक चीजों को बढ़ावा देने वाला कंटेंट भी दिखाई दिया. कम उम्र में ऐसे कंटेंट को देखने से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है और उनके व्यवहार में गंभीर बदलाव आ सकते हैं.
क्या फेसबुक और इंस्टाग्राम सुरक्षित हैं?
फेसबुक और इंस्टाग्राम पर मेटा ने ‘Sensitive Content Control’ जैसे कई फीचर शुरू किए हैं. लेकिन नए आंकड़े बताते हैं कि ये फीचर पूरी तरह प्रभावी नहीं हैं. बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये प्लेटफॉर्म अब बच्चों के लिए पहले जितने सुरक्षित नहीं रहे.
कंपनी की सफाई
मेटा का कहना है कि वह बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है. कंपनी ने संदिग्ध लोगों के साथ चैट पर रोक और आपत्तिजनक फोटो पहचानने के लिए टूल्स लगाए हैं. लेकिन कई बार ऐसा कंटेंट ‘प्राइवेट मैसेज’ के जरिए भेजा जाता है, जिसे गोपनीयता (Privacy) के कारण पूरी तरह रोकना मुश्किल होता है.
अब माता-पिता की जिम्मेदारी ज्यादा
तकनीक कितनी भी आगे बढ़ जाए, गलत लोग नए तरीके ढूंढ ही लेते हैं. ऐसे में सिर्फ कंपनी पर भरोसा करना सही नहीं है. विशेषज्ञों के अनुसार, माता-पिता को ये कदम उठाने चाहिए:
- बच्चों से खुलकर बात करें और सोशल मीडिया के खतरों के बारे में समझाएं.
- उनकी ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रखें- वे किससे बात कर रहे हैं और क्या देख रहे हैं.
- अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग्स मजबूत करें और ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा विकल्प चालू रखें.
- डिजिटल युग में प्राइवेसी जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है अपने बच्चों का सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य. सतर्क रहना ही इस समस्या का सबसे बड़ा समाधान है.
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Afreen Afaq has started her career with Network 18 as a Tech Journalist, and has more than six years experience in ‘Mobile-Technology’ beat. She is a high-performing professional with an established and proven …और पढ़ें
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