बजट 2026 : 5 नए मेडिकल टूरिज्म हब्स से दुनिया का हेल्थकेयर पावरहाउस बनेगा भारत, 1.5 लाख करोड़ का होगा बाजार

पिछले कुछ सालों से भारत ने मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में जबर्दस्त छलांग लगाई है. फिलहाल भारत मेडिकल टूरिज्म इंडेक्स में 10वें और वेलनेस में 7वें स्थान पर है. लेकिन अब बहुत जल्दी इस क्षेत्र की रफ्तार बढेगी. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार के बजट में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कई ठोस कदमों का ऐलान किया है. उन्होंने भारत को मेडिकल वैल्यू टूरिज्म (MVT) का ग्लोबल हब बनाने के लिए 5 क्षेत्रीय मेडिकल हब्स की स्थापना का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा है. इन हब्स से आधुनिक अस्पताल ढांचा, डायग्नोस्टिक सुविधाएं, इलाज के बाद की देखभाल, रिहैबिलिटेशन सेवाएं और आयुष प्रणालियां एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी. बजट में इस प्रस्ताव से ज्यादा संख्या में विदेशी मरीज भारत इलाज के लिए आएंगे. इससे न केवल विदेशी मुद्रा अर्जित होगी बल्कि भारत वैश्विक प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी. साथी ही लाखों डॉक्टरों, नर्सों, एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स, तकनीशियनों और सहायक स्टाफ के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे.

क्यों है भारत ग्लोबल मेडिकल टूरिज्म का हब
भारत पिछले कई सालों से ग्लोबल टूरिज्म का हब बना हुआ है. भारत मेडिकल टूरिज़्म इंडेक्स में 10वें स्थान पर है जबकि मेडिकल वेलनेस में भारत का 7वां वैश्विक रैंक है. इसी से समझा जा सकता है कि भारत मेडिकल टूरिज्म और मेडिकल वेलनेस में कौन सा मुकाम रखता है. यहां के मेडिकल प्रोफेशनल दुनिया के मानके के हिसाब से बहुत उच्च गुणवत्ता रखते हैं. 70-80 के दशक से हमारे देश के डॉक्टरों का अमीर देशों में बहुत बड़ा योगदान है. इसलिए वहां के लोग भी भारतीय डॉक्टरों को उच्च मुकाम देते हैं. निःसंदेह मेडिकल क्षेत्र में हमारे देश की गुणवत्ता बहुत हाई है. इसके साथ ही अमीर देशों के मुकाबले हमारे देश में बहुत कम बजट में इलाज हो जाता है. यही कारण है दुनिया के लोगों को हमारे देश पर बहुत ज्यादा भरोसा है और वे हमारे देश इलाज कराने आते हैं.

कितने विदेशी मरीज हमारे देश पहुंचते हैं
कोविड-19 के बाद भारत में मेडिकल टूरिज़्म तेज़ी से बढ़ रहा है. 2020 में लगभग 1.82 लाख विदेशी मरीज भारत इलाज कराने आए थे. 2024 में इसकी संख्या बढ़कर लगभग 6,44,387 हो गई है. यानी पिछले कुछ सालों में चार गुना से भी ज़्यादा वृद्धि हुई. 2025 के शुरुआती चार महीनों (जनवरी–अप्रैल) में ही 1,31,856 विदेशी मेडिकल मरीज भारत आए.

मेडिकल टूरिज्म और मेडिकल वेलनेस क्या है
भारत में मेडिकल टूरिज्म से ज्यादा मेडिकल वेलनेस का बाजार है. मेडिकल टूरिज्म में जब किसी व्यक्ति की बीमारी हो जाती है तो तात्कालिक इलाज कराने के लिए जो विदेशी आते हैं उसे जोड़ा जाता है जबकि मेडिकल वेलनेस बीमारियों के जोखिम से बचाव के लिए जो विदेशी आते हैं, उसे जोड़ा जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक अगर दोनों चीजों को जोड़ दिया जाए तो भारत में 75 देशों से करीब 20 लाख लोग इसके लिए यात्रा करते हैं. भारत में लाखों लोग योग, ध्यान, आयु्र्वेद, सिद्ध चिकित्सा से खुद को तरोताजा करने के लिए आते हैं. ग्लोबल वेलनेस इंस्टीट्यूट के अनुसार,2017 में वैश्विक वेलनेस टूरिज़्म बाज़ार का आकार लगभग 639 अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया था. इसमें सेकेंडरी वेलनेस ट्रैवलर्स की हिस्सेदारी कुल यात्राओं का 89 प्रतिशत और कुल खर्च का 86 प्रतिशत रही. वहीं, घरेलू वेलनेस यात्राएं कुल यात्राओं का 82 प्रतिशत और कुल खर्च का 65 प्रतिशत है.

मेडिकल टूरिज्म का कितना बड़ा व्यापार है
फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में भारत का मेडिकल टूरिज़्म बाज़ार लगभग 18.2 अरब डॉलर रहा. यह करीब 1.5 लाख करोड़ होता है. इस रिपोर्ट में भारत को 2035 तक ग्लोबल मेडिकल हब बनने के देश के महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण को दर्शाया गया है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की क्लिनिकल विशेषज्ञता को उसकी सदियों पुरानी स्वास्थ्य परंपराओं के साथ इंटीग्रेट कर दिया जाए तो मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (एमवीटी) में दुनिया का सबसे विश्वसनीय गंतव्य स्थल बन सकता है. इसके लिए फेडरेशन ने कहा कि अगर वर्तमान रफ्तार जारी रही तो 2035 तक देश का मेडिकल टूरिज्म बढ़कर 58.2 अरब डॉलर (करीब 5 लाख करोड़) तक पहुंच जाएगा.

मेडिकल टूरिज्म में भारत का क्या भविष्य है
वेलनेस टूरिज़्म बाज़ार के आकार के लिहाज़ से अमेरिका, जर्मनी, चीन, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रिया और भारत इस क्षेत्र के अग्रणी देश हैं. अब इस क्षेत्र में भारत, थाईलैंड और मैक्सिको दुनिया का सिरमौर बनने की ओर अग्रसर है. इसमें भारत का डंका बजना तय है. इसके कई कारण स्पष्ट है. भारत में हाई क्वालिटी वाला इलाज होता है. यहां का इलाज अमेरिका, यूरोप और ब्रिटेन की तुलना में 60 से 90 प्रतिशत तक कम खर्च में होता है.

डॉक्टरों का क्या है कहना
आकाश हेल्थकेयर के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. आशीष चौधरी ने कहा कि निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में 5 क्षेत्रीय मेडिकल टूरिज्म हब स्थापित करने की सरकार की योजना भारत के हेल्थकेयर सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है. इन हब्स में समर्पित आयुष केंद्र शामिल होने से समग्र उपचार को बढ़ावा मिलेगा और अंतरराष्ट्रीय मरीजों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी. ऐसे कदम न केवल उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत करेंगे, बल्कि देशभर में हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर और मेडिकल उत्कृष्टता को बढ़ाकर विकसित भारत के विजन में भी योगदान देंगे. एशियन हॉस्पिटल के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. एन.के. पांडे ने सरकार के कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित करना भारत के हेल्थकेयर इकोसिस्टम के लिए एक दूरदर्शी कदम है. एलाइड और जेरियाट्रिक सेवाओं पर जोर देने से मरीजों के इलाज के परिणामों में काफी सुधार होगा. इसके अलावा, आयुर्वेद और योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने से ग्लोबल मेडिकल टूरिज्म में भारत की स्थिति और मजबूत होगी. न्यूरो इक्वीलीब्रेम के फाउंडर राजनीश भंडारी ने बताया कि ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद का विस्तार, मेडिकल वैल्यू टूरिज्म के लिए पांच हब बनाना और आयुर्वेद एक्सपोर्ट पर नया फोकस यह संकेत देता है कि भारत पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक हेल्थकेयर उत्कृष्टता के साथ जोड़ना चाहता है. कुल मिलाकर, ये कदम बीमारी-केंद्रित इलाज से आगे बढ़कर रोकथाम आधारित, समग्र वेलनेस और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हेल्थकेयर सिस्टम की ओर भारत को ले जाते हैं.

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