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Urad Daal Farming Tips: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में किसान अब पारंपरिक धान की खेती के साथ नई फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं. कृषि विभाग किसानों को जायद सीजन में उड़द और तिल की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है. उड़द एक कम अवधि वाली फसल है जिसे मध्य मार्च से मध्य अप्रैल के बीच बोया जा सकता है. इस फसल से किसानों को अच्छी आमदनी के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने का भी फायदा मिलता है. जानिए उड़द की खेती करने का सही तरीका, बीज की मात्रा और कृषि विभाग से मिलने वाली सब्सिडी की पूरी जानकारी.
Urad Dal Cultivation Tips: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में आमतौर पर किसान धान की खेती करते हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में खेती के तरीके बदलने लगे हैं. किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ नई फसलों को भी अपनाने लगे हैं ताकि उनकी आय बढ़ सके.
इसी को देखते हुए शासन और कृषि विभाग भी किसानों को अलग-अलग फसलों के बीज उपलब्ध करा रहा है. रबी सीजन के बाद अब किसान जायद की फसलों की तैयारी में जुट गए हैं. कृषि विभाग किसानों को खास तौर पर उड़द और तिल की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है.
गर्मियों में उड़द की खेती से हो सकती है अच्छी कमाई
बालाघाट के उप संचालक कृषि फूल सिंह मालवीय ने बताया कि उड़द जायद की एक कम अवधि वाली फसल है, जिसे किसान गर्मियों में आसानी से उगा सकते हैं. इसकी बुआई का सबसे अच्छा समय मध्य मार्च से मध्य अप्रैल तक माना जाता है. अगर किसान समय पर इसकी बुआई करते हैं तो कम समय में अच्छी पैदावार मिल सकती है और बाजार में इसकी अच्छी कीमत भी मिलती है.
ऐसे तैयार करें खेत
उड़द की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी बहुत जरूरी होती है. किसान खेत में दो से तीन बार हैरो या कल्टीवेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरी बना सकते हैं. आखिरी जुताई से पहले खेत में दो से तीन टन गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर डालना फायदेमंद रहता है. इसके बाद खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था कर लेनी चाहिए और पाटा चलाकर खेत को समतल कर देना चाहिए.
इस तरीके से करें उड़द की बुआई
अगर किसान एक हेक्टेयर खेत में उड़द बोना चाहते हैं तो उन्हें करीब 12 से 15 किलो बीज की जरूरत पड़ेगी. बुआई के दौरान पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 से 34 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी करीब 10 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. बुआई के करीब 15 से 20 दिन बाद सिंचाई करना जरूरी होता है ताकि पौधे अच्छी तरह बढ़ सकें.
जमीन के लिए भी फायदेमंद है यह फसल
उड़द की खेती का फायदा सिर्फ पैदावार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मिट्टी की सेहत के लिए भी बहुत अच्छी मानी जाती है. यह फसल लेग्युमिनेसी कुल की होती है और इसकी जड़ों में राइजोबियम बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण का काम करते हैं. इससे जमीन की उर्वरता बढ़ती है और अगली फसलों जैसे गेहूं या धान को भी फायदा मिलता है.
कृषि विभाग से मिल रहे सब्सिडी वाले बीज
कृषि उप संचालक फूल सिंह मालवीय ने बताया कि सरकार तिलहन मिशन के तहत जिले में 500 हेक्टेयर क्षेत्र में तिल की खेती का लक्ष्य तय किया गया है. वहीं दलहन क्षेत्र बढ़ाने के लिए उड़द की खेती के लिए 1000 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है. किसान विकासखंड स्तर के कृषि विभाग के कार्यालय से उड़द और तिल के बीज प्राप्त कर सकते हैं. इन बीजों पर किसानों को सब्सिडी का लाभ भी दिया जा रहा है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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