एमपी-राजस्थान को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे- 44 पर बने पुल का वजूद खतरे में है। कारण लगातार नदी में रेत का अवैध खनन। माफिया इस कदर रेत निकाल रहे हैं कि पिलर के आसपास 20-25 फीट गड्ढे हो गए। एक्सपर्ट का कहना है कि अगर ऐसे ही चलता रहा तो ये पिलर ज्यादा समय
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दरअसल, नेशनल हाईवे- 44 राजस्थान के धौलपुर और मध्य प्रदेश के मुरैना जिले की सीमा पर चंबल नदी के ऊपर से गुजरा है। साल 2016-17 में इस पर लगभग 100 करोड़ का पुल बनाया गया था। इससे प्रतिदिन 5 हजार से ज्यादा वाहन गुजरते हैं।
इसके नीचे चल रहे अवैध खनन से यदि ब्रिज को नुकसान हुआ तो मप्र और राजस्थान की कनेक्टिविटी बुरी तरह प्रभावित होगी। दैनिक भास्कर की टीम उन पिलर तक पहुंची, जो कई फीट गहरे गड्ढों के बीच नदी में खड़े हुए हैं। पढ़िए रिपोर्ट…
करीब 10 साल पहले एमपी-राजस्थान को जोड़ने के लिए यह ब्रिज चंबल नदी पर बनाया गया था।

रेत माफिया ने पिलर के नीचे रेत खनन कर लिया, जिससे यहां गहरे गड्ढे हो गए।

पिलर के नीचे हुए अवैध खनन की वजह से ये कमजोर होते जा रहे हैं।
एमपी की तरफ 8 पिलर पर अवैध खनन
नेशनल हाईवे के टेक्निकल मैनेजर प्रशांत मीणा के अनुसार- यह पुल 34 पिलर पर खड़ा है। इसके नीचे बहुत तेजी से अवैध रेत खनन किया जा रहा है। धौलपुर की तरफ के पिलर सुरक्षित हैं, क्योंकि वहां खनन नहीं है। सभी पिलर पानी में हैं।
भास्कर पड़ताल में सामने आया कि मध्य प्रदेश के मुरैना की तरफ 8 पिलर ऐसे हैं, जिनके आसपास रेत माफिया ने तेजी से रेत निकाली है। इस कारण पिलर के आसपास कई फीट गहराई हो चुकी है। पिलर कमजोर हुए तो पुल की मजबूती प्रभावित होगी।

ब्रिज को मजबूती देने वाले पिलर के आसपास खुदाई तेजी से चल रही है।
सुबह से होने लगता है खनन
दैनिक भास्कर की टीम जब चंबल नदी पहुंची तो सुबह करीब 9 बजे थे। टीम ने पाया कि रेत माफिया नदी से रेत निकालने में जुटे थे। मशीनों से खुदाई हो रही थी। डंपर रेत भरकर तेजी से बाहर निकल रहे थे।
रेत निकालने वालों ने इस बात का भी ध्यान नहीं रखा कि पिलर के आसपास का स्थान तो प्रभावित नहीं हो रहा। वे राजघाट के दोनों ओर की रेत समेटने में जुटे थे।
टीम यहां दोपहर होने का इंतजार करने लगी, क्योंकि लोगों ने बताया था कि दोपहर में माफिया कम सक्रिय होते हैं। जैसे-जैसे समय धूप तीखी हुई, यानी दोपहर करीब 1 बजे तक माफिया की संख्या नहीं के बराबर रह गई।
माफिया के नदी से जाते ही टीम मौके पर पहुंची और पुल के पिलर को करीब से देखा। रेत निकालने के कारण पिलरों की मजबूती कमजोर होती दिखी।

रेत और ट्रॉलियों में रेत भरकर भेजी जाती है।
पिलर नंबर 1 से 4 तक 50 फीट से गहरा खनन
टीम ने पाया कि नदी की तरफ लगे पिलर नंबर- 1, 2, 3, 4 के चारों तरफ माफिया ने काफी खुदाई की है। यहां 30 से 50 फीट तक गहरे गड्ढे थे। हालात ऐसे हैं कि यदि जानवर या कोई व्यक्ति फंस जाए तो खुद को डूबने नहीं बचा पाएगा। गहराई अधिक होने से पिलर की सतह निकलने लगी है। हालांकि पानी भरने से अभी यह छिपी हुई दिखी।
पिलर नंबर- 6 ऊपरी सतह पर है, जहां जेसीबी की मदद से रेत माफिया खुदाई कर रहे हैं। यहां भी 20-25 फीट तक खुदाई की जा चुकी है। पिलर नंबर- 7, 8 भी मुरैना तरफ ऊपरी सतह पर है।
यहां सबसे अधिक खुदाई की गई है, जो अभी भी जारी है। दरअसल, ये दोनों पिलर सूखी सतह पर हैं, जहां चंबल नदी में आई बाढ़ के कारण अधिक रेत छूट जाती है।

पिलर के आसपास करीब 20 से 50 फीट तक खुदाई की जा चुकी है।
राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में हो रहा खनन
जहां खनन हो रहा, वह राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में आता है, जो 437 किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। अधिकांश क्षेत्रों में खनन हो रहा है। चंबल राजघाट पर यह काफी बड़े स्तर पर जारी है। देखने पर ऐसा लगता है जैसे सरकारी ठेके के तहत काम चल रहा हो।
हर तरफ जेसीबी लगी हैं। सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉली रेत भरने अपनी-अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। राजघाट पुल के दोनों तरफ यही नजारा है। इन्हें रोकने के लिए जिला राजस्व, वन, पुलिस को मिलाकर एक टास्क फोर्स बनाई गई थी। ग्वालियर हाईकोर्ट ने भी इस पर रोक लगाई है।

चम्बल राजघाट पर रेत का अवैध खनन बड़े स्तर से जारी है।
सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान
देवरी चंबल घड़ियाल सैंक्चुरी जलीय जीवों के संरक्षण के लिए बनाई गई थी। यहां विलुप्त होती घड़ियाल प्रजाति, विशेष प्रजाति के कछुए, डॉलफिन आदि जलीय जीवों को संरक्षित करने का प्रावधान है। इसके बावजूद चंबल नदी में लगातार खनन जारी है।
पिछले हफ्ते इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। चिंता जताते हुए कहा था कि संरक्षित क्षेत्र में पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद रेत का अवैध खनन और परिवहन जारी है, यह जो विलुप्त प्रजातियों के लिए काल बन रहा है।

जैतपुर घाट पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने चंबल नदी में घड़ियाल छोड़े थे।
जहां सीएम ने छोड़े घड़ियाल वहीं अवैध खनन
चंबल राजघाट पर सबसे अधिक अवैध खनन उसी क्षेत्र (जैतपुर घाट) में किया जा रहा है। जहां 17 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घड़ियाल छोड़े थे। सीएम ने यहां घाट को चंबल सफारी की तरह विकसित पर्यटन स्थल बनाने की घोषणा की थी।
डीएफओ बोले- मैं बाहर हूं, आने पर कार्रवाई करेंगे



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यह खबर भी पढ़ें चंबल में 100 ट्रैक्टर–डंपरों का VIDEO

चंबल में अवैध रेत खनन खुल्लम खुल्ला हो रहा है। 1000 से ज्यादा डंपर, ट्रक, ट्रैक्टर-ट्राॅली नदी में रेत के लिए दिनभर फर्राटा भर रहे हैं। माफिया जेसीबी से नदी को खोखला कर रहे हैं, लेकिन कोई देखने वाला नहीं है। हालात ऐसे हैं कि एसपी ऑफिस, 6 थाने के सामने से यह वाहन दिनभर दौड़ते हैं, लेकिन इन्हें कोई रोकने वाला नहीं है। पूरी खबर पढ़िए…
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