हिंदी और मातृभाषाओं के संवर्धन के उद्देश्य से कार्यरत मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा प्रेस क्लब में ‘हिंदी गौरव अलंकरण समारोह 2026’ का आयोजन किया गया। समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार नर्मदा प्रसाद उपाध्याय और अतुल तारे को वर्ष 2026 के ‘हिंदी गौरव अलंकरण’ से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में भाषा के व्यवहारिक उपयोग, देवनागरी लिपि के संरक्षण और मातृभाषा आधारित शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया। मुख्य अतिथि विष्णु सदाशिव कोकजे ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में होगी तभी वास्तविक विकास संभव है। इच्छाशक्ति मजबूत होने से भाषाओं का विस्तार और समृद्धि सुनिश्चित होगी। हिंदी के साथ देवनागरी भी जरूरी कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों के बावजूद हिंदी सशक्त बनी रहेगी। उन्होंने हिंदी के साथ देवनागरी लिपि के संरक्षण को भी आवश्यक बताया। भाषा को व्यवहार में लाने की जरूरत विशेष अतिथि संजय द्विवेदी ने कहा कि हिंदी के सम्मान के लिए उसे सरकारी और सामाजिक कार्यव्यवहार में लाना जरूरी है। उन्होंने भाषायी पाखंड से बचने और भारतीयता के भाव को सशक्त करने की बात कही। साहित्य और कला के अंतर्संबंध पर जोर सम्मानित साहित्यकार नर्मदा प्रसाद उपाध्याय ने कहा कि हिंदी लोक से समृद्ध हुई है और साहित्य व कला के बीच अंतःअनुशासन की आवश्यकता है।
अतुल तारे ने कहा कि समाचार पत्रों ने हिंदी के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाई है। एआई और आभासी दुनिया के इस दौर में अपनी भाषा से जुड़ाव ही स्व-बोध कराता है। पांच कवियों को ‘काव्य गौरव अलंकरण’ समारोह में नागदा के कमलेश दवे, मांडव के डॉ. पंकज प्रसून चौधरी, उज्जैन की निशा पंडित, बड़नगर के पुष्पेंद्र जोशी ‘पुष्प’ और भोपाल की शिवांगी प्रेरणा को ‘काव्य गौरव अलंकरण’ प्रदान किया गया। इस अवसर पर साहित्यकार संध्या राणे के कविता संग्रह ‘शुभम् करोति’ का लोकार्पण भी किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अखिलेश राव ने किया, जबकि स्वागत उद्बोधन डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने दिया। समारोह में शहर के अनेक साहित्यकार, शिक्षाविद् और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। .