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Balaghat News: बालाघाट के एसपी आदित्य मिश्रा ने लोकल 18 से कहा कि सरेंडर कर चुके नक्सलियों का पहले से कोई दस्तावेज नहीं था. सरेंडर पॉलिसी का लाभ दिलाने के लिए एमपी पुलिस महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के प्रशासन से संपर्क कर रही है.
बालाघाट. 1967 में शुरू हुआ कथित सशस्त्र क्रांति मार्च अब खत्म होता दिखाई दे रहा है. केंद्र सरकार ने नक्सलवाद के खात्मे के लिए एक डेडलाइन रखी. ऐसे में सुरक्षाबलों ने रणनीति बदली और एंटी नक्सल ऑपरेशन में तेजी लाई गई. नतीजतन मध्य प्रदेश में करीब 35 साल तक प्रभावित रहे इलाके नक्सलवाद से मुक्त हो गए. बात 12 दिसंबर 2025 की है, जब बालाघाट में दो नक्सलियों दीपक उइके और रोहित ने सीआरपीएफ के कोरका कैंप में जाकर सरेंडर किया. इसी के साथ बालाघाट समेत पूरे मध्य प्रदेश से नक्सलवाद खत्म हुआ. इस बात को भी करीब तीन महीन बीत चुके हैं. ऐसे में आपके मन में भी सवाल उठ रहे होंगे कि फिलहाल नक्सलियों के साथ क्या हो रहा है और क्या उन्हें सरकार की सरेंडर पॉलिसी का फायदा मिला. इन सवालों के जवाब जानने के लिए लोकल 18 ने बालाघाट के पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा से बातचीत की.
मध्य प्रदेश में अगस्त 2023 में नक्सलियों के सरेंडर के लिए नई पॉलिसी तैयार की गई लेकिन शुरुआती 26 महीने तक किसी भी नक्सली ने सरेंडर नहीं किया. बढ़ते एंटी नक्सल ऑपरेशन के दबाव और मुठभेड़ में जान गंवाते नक्सलियों की हालत देख नक्सलियों ने सरेंडर करना शुरू कर दिया. एक नवंबर 2025 ऐतिहासिक दिन रहा, जब सुनीता ओयाम ने सरेंडर किया. उसके 42 दिन के भीतर नक्सलियों द्वारा घोषित MMC जोन (मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़) के 42 नक्सलियों ने सरेंडर किया. इसमें 13 नक्सलियों ने बालाघाट के अलग-अलग कैंप में सरेंडर किया था.
बालाघाट में इन नक्सलियों ने किया सरेंडर
बालाघाट में एक नवंबर को सुनीता ओयाम ने सरेंडर किया था. इसके बाद 6 दिसंबर की रात में मध्य प्रदेश इतिहास का सबसे बड़ा नक्सली सरेंडर हुआ. उसमें नक्सली नवीन, कबीर उर्फ महेंद्र, राकेश, समर उर्फ राजू आत्राम, लालसू, शिल्पा, जयशीला, जरीना, सोनी, जानकी और विक्रम ने सुरक्षाबलों के सामने हथियार डाले. हालांकि पुलिस अधिकारियों ने कोई पुष्टि नहीं की. आखिर में बालाघाट के रहने वाले दीपक उइके और उसके साथी रोहित ने कोरका कैंप में सरेंडर किया और बालाघाट सहित पूरा प्रदेश नक्सलवाद से मुक्त हुआ.
अब कहां हैं सरेंडर कर चुके नक्सली?
सभी सरेंडर कर चुके नक्सली बालाघाट की पुलिस लाइन में सुरक्षाबलों की निगरानी में हैं. अधिकारी उनसे पूछताछ कर रहे हैं. इसमें उनके बीते एक साल का प्लान, डंप और आने वाले साल की क्या प्लानिंग थी, के बारे में पूछा जा रहा है. इसके अलावा मध्य प्रदेश की आत्मसमर्पण नीति के तहत उन्हें लाभ दिलाने के लिए दस्तावेज भी तैयार किए जा रहे हैं.
दस्तावेज बनाना बड़ी चुनौती
बालाघाट के एसपी आदित्य मिश्रा ने लोकल 18 को बताया कि सरेंडर हुए नक्सलियों का पहले से कोई दस्तावेज नहीं था. ऐसे में सरेंडर पॉलिसी का लाभ दिलाने के लिए पुलिस महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के प्रशासन से संपर्क कर रही है. नक्सलियों के परिजनों के बुनियादी दस्तावेज यानी आधार कार्ड नहीं बने थे. पहले उनके दस्तावेज बनवाए गए, फिर सरेंडर नक्सलियों के. अब तक 13 में से 7 नक्सलियों के दस्तावेज बनकर पूरी तरह तैयार हैं. 7 नक्सलियों के बैंक खाते भी खुलवाए जा चुके हैं. वहीं 31 मार्च से पहले सभी सरेंडर नक्सलियों के दस्तावेज तैयार हो जाएंगे. जिसके बाद सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को मध्य प्रदेश शासन की पुनर्वास नीति 2023 के तहत लाभ में मिलने वाली राशि मिल जाएगी.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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